संविधान (Constitution) | संविधान का निर्माण

 संविधान(Constitution)

Constitution
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संविधान का अर्थ है कि नागरिकों और सरकार के व्यवहारों को सीमित करना। संविधान एक लिखित दस्तावेज होता है, जिसमें सरकार के अंगों शक्तियां और सीमाओं का उल्लेख होता है साथ ही साथ इसमें नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों का भी उल्लेख होता है।
इस तरह सीमित सरकार को संविधान हुआ दी सरकार कहा जाता है। जे लिंकन ने कहा है-जिस राज्य में संविधान नहीं वह राज्य नहीं अराजकता है।
संविधान को कार्य रूप व्यवहार में लाना है राज्य व्यवस्था कहा जाता है। इस तरह संविधान सिद्धांत है और राज्य व्यवस्था व्यवहार है।


राज व्यवस्था का मोटा-मोटा अर्थ राज्य की व्यवस्था से है। उठता है कि राज्य क्या है ?

➡ राज्य एक अमूर्त अवधारणा है । राज्य को हम इसके निम्नलिखित तथ्यों से समझ सकते हैं।
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उपरोक्त तत्व में राज्य का सबसे महत्वपूर्ण तत्व सम्प्रभुता है । सम्प्रभुता के बिना राज्य-राज्य नहीं हो सकता इसीलिए इसे राज्य की आत्मा कहा जाता है। सम्प्रभुता का अर्थ- "सर्वोच्च शक्ति सर्वोच्च आदेश" होगा। यहां सर्वोच्च शक्ति का अर्थ आंतरिक किया बाहरी हस्तक्षेप से मुक्ति है। जिसके पास इस तरह की सर्वोच्च शक्ति होगी वही स्वतंत्र होगा और वहीं राज्य कहलाने का अधिकारी होगा। जैसे 1947 से पहले भारत में जनसंख्या भू-भाग सरकार तीनों तत्व मौजूद थे लेकिन संप्रभुता या सर्वोच्च शक्ति नहीं थी। यह संप्रभुता ब्रिटेन के पास गिरवी पड़ी थी। ब्रिटेन ही भारतीयों को आदेश देता था। इसीलिए भारत ब्रिटेन का गुलाम या उपनिवेश था। 15 अगस्त 1947 को यह संप्रभुता भारत को हासिल हुई थी तब जाकर भारत एक स्वतंत्र सम्प्रभु राज्य बना।


शक्ति पृथक्करण के आधार पर सरकारों का वर्गीकरण


हम जानते हैं कि सरकार की तीन शक्तियां होती हैं -
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। यदि सरकार की शक्तियों में से-


(1) विधायिका और कार्यपालिका


विधायिका और कार्यपालिका शक्ति प्रथक-प्रथक हाथों में होती हैं और इनका चुनाव भी पृथक-पृथक होता है। तो ऐसी सरकार को अध्यक्षीय सरकार कहेंगे। जैसे अमेरिका में राष्ट्रपति का काम कानूनों को लागू करना है। अर्थात यह कार्यपालिका है। कांग्रेस काम कानून बनाना है । अर्थात वह विधायिका है। कांग्रेस और राष्ट्रपति का चुनाव भी अलग अलग होता है। राष्ट्रपति का चुनाव 4 वर्ष के लिए होता है। 4 वर्ष से पहले उसे केवल और केवल महाभियोग से हटाया जा सकता है अन्यथा नहीं । इस तरह अध्यक्ष जी सरकार एक स्थिर सरकार होती है।
इन सरकारों की सबसे बड़ी कमी होती है कि इनमें विधायिका और कार्यपालिका के बीच गतिरोध पैदा होता है।
(2) ऐसी सरकार जिसमें कार्यपालिका विधायिका से मिली रहती हैं संसदीय सरकार कहलाते हैं अर्थात कार्यपालिका (मंत्रीपरिषद) विधायिका से बनती हैं । जैसे भारत में जनता M.P (विधायिका के सदस्य) को चुनती है। जिस दल के सबसे अधिक M.P होते हैं राष्ट्रपति उचित दल के किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर देता है। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति इन्हीं M.P में से कुछ को मंत्री नियुक्त कर देता है। प्रधानमंत्री और उसके मंत्री सामूहिक रूप से इन्हीं M.P (सांसद) के प्रति उत्तरदायी होते हैं। अत: यदि M.P प्रधानमंत्री और उसके मंत्री परिषद के विरुद्ध अविश्वास व्यक्त कर दे तो इन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा। इस तरह से यह एक स्थिर सरकार होती है। यही उसकी सबसे बड़ी कमी होती है। इसकी सबसे बड़ी अच्छाई यही होती है। कि यह एक उत्तरदायी सरकार होती है । इसीलिए यह निरंकुश सरकार नहीं होती है।
इस प्रकार अध्यक्षयी सरकार में सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति होता है इसीलिए इसे राष्ट्रपति सरकार कहते हैयी
संसदीय सरकारों में सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री या कैबिनेट होती है इसीलिए इसे प्रधानमंत्री की सरकार या कैबिनेट सरकार कहा जाता है

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